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कलम का सिपाही स्वाध्याय | Kalam ka Sifayi swadhyay

Chapter 6: कलम का सिपाही  .

कलम का सिपाही स्वाध्याय | Kalam ka Sifayi swadhyay

आकलन [PAGE 32]   

आकलन | Q 1 | Page 32
लिखिए :

प्रेमचंद का व्यक्तित्व अधिक विकसित होता है, जब.....
(१) ________________________
(२) ________________________
Solution :
(१) वह निम्न मध्यवर्ग और कृषक वर्ग का चित्रण करते हुए अपने कृषक युग की प्रतिगामी शक्तियों का विरोध करते हैं।
(२) वे एक श्रेष्ठ विचारक और समाज सुधारक के रूप में प्रकट या सहोते हैं।

आकलन | Q 2 | Page 32
कहानीउपन्यास
  
  
  
  
  
 
Solution :

कहानी

उपन्यास

कफन

प्रतिज्ञा

बूढ़ी काकी

गोदान

नमक का दरोगा

रंगभूमि

 

सेवासदन

 

निर्मला


निम्नलिखित पात्रों की विशेषताएँ -         

आकलन | Q 3.1 | Page 32
होरी
Solution :
होरी प्रेमचंद जी द्वारा रचित विख्यात उपन्यास 'गोदान' का मुख्य पात्र है। वह जीवन के अनेक संघर्षों का सामना करने वाले एक साधारण किसान का प्रतिनिधित्व करता है, जो भूख, बीमारी, उपेक्षा और मौत से लड़ता रहा है। होरी जीवन भर मेहनत करता है, अनेक कष्ट सहता है। बहुत कम उम्र में ही वह वृद्ध दिखाई देता है। होरी महाजनों के क्रूर शोषण चक्र में फँसा हुआ है। उस पर धर्म, नैतिकता, संस्कारों और आदर्शों का गहरा दबाव है। वह परंपराओं, रूढ़ियों और धार्मिक कुरीतियों का शिकार है।

आकलन | Q 3.2 | Page 32
अलोपीदीन
Solution :
अलोपीदीन: अलोपीदीन प्रेमचंद जी द्वारा लिखित बहुचर्चित कहानी 'नमक का दरोगा' का एक पात्र है, जो अपने इलाके का प्रभावशाली जमींदार है। समाज में उसका बोलबाला है। वह धन का उपासक है। हमेशा रिश्वत देकर अपने कालाबाजारी के काम निकलवाता है। उसका मानना है कि लक्ष्मी के आगे सब कमजोर हैं।

आकलन | Q 3.3 | Page 32
वंशीधर
Solution :
वंशीधर : वंशीधर एक साधारण निम्न मध्यमवर्गीय परिवार का युवक है। वह ब्रिटिश शासन में पुलिस महकमे का एक ईमानदार और कर्तव्यपरायण अधिकारी है और एक प्रतिष्ठित पद पर कार्यरत है। वह रिश्वत और चापलूसी से घृणा करता है। वंशीधर नमक के अवैध कारोबार के सिलसिले में अलोपीदीन को गिरफ्तार करने में जरा भी नहीं हिचकता। भले ही इसके परिणामस्वरूप उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है।

निम्नलिखित भिन्नार्थक शब्दों के अर्थ लिखिए :        

शब्द संपदा [PAGE 32]
शब्द संपदा | Q 1 | Page 32
अपत्य - ______
अपथ्य - ______
Solution :
अपत्य – संतान
अपथ्य – अहितकर

शब्द संपदा | Q 2 | Page 32
 कृपण – ______
कृपाण – ______
Solution :
कृपण – कंजूस
कृपाण – छोटी तलवार

शब्द संपदा | Q 3 | Page 32
श्वेत – ______
स्वेद – ______
Solution :
श्वेत – सफेद
स्वेद – पसीना

शब्द संपदा | Q 4 | Page 32
पवन – ______
पावन – ______
Solution :
पवन – वायु
पावन – पवित्र

शब्द संपदा | Q 5 | Page 32
वस्तु – ______
वास्तु – ______
Solution :
वस्तु – चीज
वास्तु – भवन

शब्द संपदा | Q 6 | Page 32
व्रण – ______
वर्ण – ______
Solution :
व्रण – घाव
वर्ण – रंग

शब्द संपदा | Q 7 | Page 32
शोक – ______
शौक – ______
Solution :
शोक – दुख
शौक – विशेष रुचि

शब्द संपदा | Q 8 | Page 32
दमन – ______
दामन – ______
Solution :
दमन – दबाना
दामन – आचाल

अभिव्यक्ति [PAGE 32]        

अभिव्यक्ति | Q 1 | Page 32
‘वर्तमान कृषक जीवन की व्यथा’, इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
Solution :
भारत एक कृषिप्रधान देश है। यहाँ आज भी अधिकांश लोग कृषि पर ही निर्भर करते हैं। हमारे देश का कृषक कर्ज में ही जन्म लेता है और जिंदगी भर कर्जदार ही बना रहता है। कभी खाद के लिए, कभी बीज के लिए और कभी बीमारी के इलाज के लिए कृषकों को जब-तब महाजनों से कर्ज लेना ही पड़ता है। कृषक को हर ऋतु में काम करना होता है। चाहे कितनी ही गरमी हो, वर्षा हो या सर्दी हो। गरमी की तपती दुपहरी में जब अन्य लोग छाया और हवादार स्थानों में विश्राम करते हैं, उस समय कृषक खेतों में काम कर रहा होता है। वर्षा के समय भी उसे खेतों में कभी गोड़ाई व कभी निराई करना होता है। कड़ाके की सर्दी में वह रात को खुले खेतों में फसल की चौकसी करता है।

 कृषक अपना खून-पसीना एक करके अन्न उपजाता है। जो दूसरों को अन्न देता है, वह स्वयं बहुत अधिक की कामना नहीं करता। बस चाहता है कि उसके परिवार को भरपेट भोजन मिल जाए। अधिकतर कृषकों का स्वास्थ्य दिनोंदिन गिरता जाता है और अंत में बीमारी और भुखमरी का शिकार होकर वे दुनिया से कूच कर जाते हैं। हालांकि भारत सरकार किसानों के लिए अनेक प्रकार की योजनाएँ चलाती रहती है परंतु यह सरकारी मदद किसानों तक पहुँचती ही नहीं है।

अभिव्यक्ति | Q 2 | Page 32
‘ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा सफलता के सोपान हैं’, इस विषय पर अपना मत लिखिए।
Solution :
ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा सफलता के सोपान हैं। ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा व्यक्ति को सभी परेशानियों से मुक्त और निडर बनाती हैं। ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ होना आसपास के लोगों का विश्वास, खुशियों व आशीर्वाद जैसी बहुत-सी चीजें प्राप्त करने में एक व्यक्ति की मदद करता है। आज की दुनिया छल, कपट, झूठ और फरेब की दुनिया है। अनेक लोग ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुणों के स्थान पर छल, फरेब, धोखाधड़ी, बेईमानी को अधिक महत्त्व देते हैं। वे अपनी धूर्तता को कूटनीति का नाम देते हैं। वे नहीं जानते कि जीवन में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का बहुत महत्त्व है। झूठ और कपट का भंडाफोड़ एक-न-एक दिन अवश्य होता है। 

लोगों को एक बार धोखा दिया जा सकता है। लेकिन चालाकी से उन्हें बार-बार मूर्ख बनाना कठिन है। आज वही व्यक्ति उन्नति कर सकता है, जिसके कार्य का आधार ईमानदारी हो, जिसका चरित्र बेदाग हो। कोई भी व्यक्ति यदि पूरी ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करे तो उसे उच्चतम पद पर पहुँचने से कोई नहीं रोक सकता। कई ऐसे लोग होते हैं, जो घटिया दर्जे के उपायों के द्वारा कम समय में धन तो कमा लेते हैं, परंतु समाज में उन्हें प्रतिष्ठा नहीं मिल पाती।

पाठ पर आधारित लघूत्तरी प्रश्न [PAGE 33]        

पाठ पर आधारित लघूत्तरी प्रश्न | Q 1 | Page 33
रूपक के आधार पर प्रेमचंद जी की साहित्यिक विशेषताएँ लिखिए।
Solution :
युग प्रवर्तक प्रेमचंद जी के साहित्य में तत्कालीन समाज और इतिहास बोलता है। इनकी रचनाएँ ग्रामीण जीवन की झाँकियों से ओतप्रोत है। उसमें शिक्षा, शोषण, शोक, हर्ष, मोह, लिप्सा का अत्यंत सजीव चित्रण हुआ है। इनका दृष्टिकोण सर्वत्र मानवतावादी था। प्रेमचंद जी की शैली अत्यंत आकर्षक तथा मार्मिक है। अपने उपन्यासों में उन्होंने मजदूर और किसान से लेकर पूँजीपतियों तक के ऐसे स्वाभाविक चित्र उपस्थित किए हैं कि समाज का वास्तविक रूप सामने आ जाता है। 

समाज-सुधार संबंधी समस्याओं को सामने रखकर उन्होंने इनका सही हल खोजने का प्रयत्न किया है मुंशी प्रेमचंद एक क्रांतिकारी लेखक थे। प्रेमचंद शताब्दियों से पद-दलित, अपमानित और निष्पोषित कृषकों की आवाज थे, पर्दे में कैद, पद पद पर लांछित और असहाय नारी जाति की महिमा के जबरदस्त वकील थे। गरीबों और बेकसों के मसीहा थे।

पाठ पर आधारित लघूत्तरी प्रश्न | Q 2 | Page 33
पाठ केआधार पर ग्रामीण और शहरी जीवन की समस्याओं को रेखांकित कीजिए।
Solution :
ग्रामीण जीवन : भारत गाँवों का देश है। यहाँ की अधिकतम जनता आज भी गाँवों में निवास करती है और कृषि कार्य से जुड़ी है। किसानों की बड़ी दयनीय स्थिति है। वह सदैव कर्ज के बोझ से दबा रहता है। गांव में आज भी मूलभूत आवश्यकताओं की कमी है। खेती के साधन हों या घर-गृहस्थी का सामान, गाँववासियों को शहरों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। यहाँ विकास की गति अत्यंत मंद है। गांवों में आज भी शिक्षा का साम्राज्य है। अनेक गाँवों में स्कूल नहीं हैं, स्कूल है तो शिक्षक नहीं हैं। इसी प्रकार वहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है। या तो अस्पताल नहीं हैं, अस्पताल है तो डॉक्टर नहीं हैं। परिवहन के साधनों का नितांत अभाव है।

शहरी जीवन : पिछले कुछ दशकों से ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में रहने वाले लोग रोजगार की तलाश में बेतहाशा शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। शहरों में आवास की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वहाँ दड़बेनुमा मकानों की भीड़ बढ़ती जाती है। जिधर दृष्टि जाती है, रंग-बदरंग, ऊल-जलूल बेतरतीब मकान-ही-मकान दिखाई पड़ते हैं। बिजली, पानी, सीवर, सड़क और परिवहन प्रणाली की कमी है। शहर कूड़े का ढेर बनते जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर वाहनों से होने वाला प्रदूषण, लगातार होने वाला शोर, भीड़, धुआँ असहज महसूस कराता है। देर रात तक ऑफिस, दुकानें खुली रहती हैं। बस, ट्रेन, टैक्सियाँ, स्कूटर्स सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। भीड़भाड़, ट्रैफिक जाम और अपराध नगरों में रोज की बात है।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान [PAGE 33]        

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 1 | Page 33
जानकारी दीजिए :
डॉ. सुनील केशव देवधर जी लिखित रचनाएँ-
Solution :
(1) मत खींचो अंतर रेखाएँ (काव्य संग्रह)
(2) मोहन से महात्मा
(3) आकाश में घूमते शब्द (रूप संग्रह)
(4) संवाद अभी शेष है।
(5) संवादों के आईने में (साक्षात्कार)

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 2 | Page 33
रेडियो रूपक की विशेषताएँ-
Solution :
रेडियो एक श्रव्य माध्यम है। रेडियो रूपक विधा का विकास नाटक से हुआ है। इसका मंचन अदृश्य होता है। इसका क्षेत्र अत्यंत विकसित है। दृश्य-अदृश्य जगत के किसी भी विषय, वस्तु या घटना पर रेडियो रूपक लिखा जा सकता है। यह ध्वनि और संगीत
का समन्वित रूप है। क्योंकि इसे केवल सुना जा सकता है। इसके प्रस्तुतीकरण का ढंग रोचक, सहज, प्रवाहमयी तथा संवादात्मक होता है।

कोष्ठक की सूचना के अनुसार काल परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए -

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान [PAGE 33]

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 1 | Page 33
मछुवा नदी के तट पर पहुँचा । (सामान्य वर्तमानकाल)
Solution :
मछुवा नदी के तट पर पहुँचता है।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 2 | Page 33
एक बड़े पेड़ की छाँह में उन्होंने वास किया। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
Solution :
एक बड़े पेड़ की छाँह में वे वास कर रहे हैं।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 3 | Page 33
आदमी यह देखकर डर गया। (पूर्ण वर्तमानकाल)
Solution :
आदमी यह देखकर डर गया है।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 4 | Page 33
वे वास्तविकता की ओर अग्रसर हो रहे हैं। (सामान्य भूतकाल)
Solution :
वे वास्तविकता की ओर अग्रसर हुए।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 5 | Page 33
उन लोगों को अपनी ही मेहनत से धन कमाना पड़ता है। (अपूर्ण भूतकाल)
Solution :
उन लोगों को अपनी ही मेहनत से धन कमाना पड़ रहा था।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 6 | Page 33
बबन उसे सलाम करता है। (पूर्ण भूतकाल)
Solution :
बहन ने उसे सलाम किया था।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 7 | Page 33
हम स्वयं ही आपके पास आ रहे थे। (सामान्य भविष्यकाल)
Solution :
हम स्वयं ही आपके पास आएँगे।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 8 | Page 33
साहित्यकार अपनेसामयिक वातावरण सेप्रभावित हो रहा है। (सामान्य भूतकाल)
Solution :
साहित्यकार अपने सामाजिक वातावरण से प्रभावित हुआ।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 9 | Page 33
आकाश का प्यार मेघों के रूप में धरती पर बरसने लगता है। (पूर्ण वर्तमानकाल)
Solution :
आकाश का प्यार मेघों के रूप में धरती पर बरसने लगा है।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 10 | Page 33
आप सबको जीत सकते हैं। (सामान्य भविष्यकाल)
Solution :
आप सबको जीत सकेंगे।

Balbharati solutions for Hindi - Yuvakbharati 11th Standard HSC Maharashtra State Board chapter 6 - कलम का सिपाही [Latest edition]

लेखक परिचय ः सुनील केशव देवधर जी का जन्म २१ जुलाई १९5६ को छतरपुर (मध्य प्रदेश) में हुआ । आपने बी.सी.जे. (पत्रकारिता) एम.ए. (अर्थशास्त्र, हिंदी) तथा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। रोचकता आपके रेडियो रूपक लेखन की विशेषता है । अभिनय तथा संवाद लेखन के रूप में आप फिल्मों से भी जुड़े हुए हैं। आप ऐसे सृजनधर्मी हैं जो आकाशवाणी के कार्यक्रमों को साहित्यिक रूप देने की क्षमता रखते हैं। 

प्रमुख कृतियाँ ः ‘मत खींचो अंतर रेखाएँ’ (काव्य संग्रह), ‘मोहन से महात्मा’, ‘आकाश में घूमते शब्द’ (रूपक संग्रह) ‘संवाद अभी शेष हैं’, ‘संवादों के आईने में’ (साक्षात्कार) आदि । 

विधा परिचय ः ‘रेडियो रूपक’ एक विशेष विधा है, जिसका विकास नाटक से हुआ है। रेडियो रूपक का क्षेत्र विस्तृत है । दृश्य-अदृश्य जगत के किसी भी विषय, वस्तु या घटना पर रूपक लिखा जा सकता है। इसके प्रस्तुतीकरण का ढंग सहज, प्रवाही तथा संवादात्मक होता है। विकास की वास्तविकताओं को उजागर करते हुए जनमानस को इन गतिविधियों में सहयोगी बनने की प्रेणा देना रेडियो रूपक का उद्देश्य होता है । विष्णुप्रभाकर, लक्ष्मीनारायण लाल, रेखा अग्रवाल, कन्हैयालाल नंदन, लोकनंदन, सोमदत्त शर्मा आदि ने रेडियो रूपक को समृद्ध करने में अपना योगदान दिया । 

पाठ परिचय ः प्रस्तुत ‘रेडियो रूपक’ उपन्यास सम्राट प्रेमचंद जी पर आधारित है। किसान और मजदूर वर्ग के मसीहा प्रेमचंद जी की रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं । साहित्य द्‌वारा प्रेमचंद जी ने जीवन के मूल तत्त्वों और सत्य को सामंजस्यपूर्ण दृष्टि से प्रस्तुत किया है। सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से समाज को विकास की दिशा प्रदान करना ही उनकी साहित्य रचनाओं का उद्देश्य है । लेखक ने यहाँ साहित्यकार प्रेमचंद जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है। 

Balbharati solutions for Hindi - Yuvakbharati 11th Standard HSC Maharashtra State Board chapter 6 - कलम का सिपाही 

(लोकसंगीत के ध्वनि प्रभाव के साथ स्वर का उभरना।) 

प्रथम स्वर : हिंदी के उपन्यास तथा कहानी की विकास यात्रा, सामयिक जीवन की विशालता, अभिव्यक्ति का खरापन, पात्रों की विविधता, सामाजिक अन्याय का घोर विरोध, मानवीय मूल्यों से मित्रता और संवेदना, साहित्य की साधना, धन का शत्रु और किसान वर्ग का मसीहा-यानी मुंशी प्रेमचंद! 

द्‌वितीय स्वर : मुंशी प्रेमचंद जिन्होंने अपने युग की चुनौतियों को सामाजिक धरातल पर स्वीकारा और नकारा। उन्होंने इन समस्याओं और मान्यताओं के जीते-जागते चित्र उपस्थित किए जो मध्यम वर्ग, किसान, मजदूर, पूँजीपति, समाज के दलित और शोषित व्यक्तियों के जीवन को संचालित करती हैं। 

प्रथम स्वर : उनका साहित्य सृजन विपुल था लेकिन विपुलता ने उनके लेखन की गुणवत्ता को कभी ठेस नहीं पहुँचाई, उपन्यास हो अथवा कहानी, उसमें कहीं भी कोई कमी नहीं आने दी। 

द्‌वितीय स्वर : समय की धड़कनों से जुड़े, सजग आदर्शवादी और साथ ही प्रामाणिकता के संवेग को अपने-आप में धारण करने वाले, इस कलम के सिपाही के कृतित्व की स्थायी देन की ऐसी मुहावरेदार और सहज भाषा है, जो पहले कभी नहीं थी। साथ ही, उनका लेखन आज भी प्रासंगिक लगता है । 

प्रथम स्वर : उनके साहित्य का मूल स्वर है - ‘डरो मत’ और जो साहित्यकार अपने युग को अभय नहीं देता, वह किसी भी अन्याय से जूझने की शक्ति नहीं देता, और जो ऐसी शक्ति नहीं देता, वह युग जीवन का संगी नहीं हो सकता। उन्होंने युग को जूझना सिखाया है, लड़ना सिखाया है । 

द्‌वितीय स्वर : लेकिन प्रेमचंद आज भी जीवन से जुड़े हुए हैं, वे युगजीवी हैं और युगांतर तक मानवसंगी दिखाई पड़ते हैं - यही कारण है कि आज प्रेमचंद और उनका साहित्य सभी जगह परिसंवाद, परिचर्चा का विषय है। 

प्रथम स्वर : चाहे शिक्षा संबंधी अायोजन हो या विचार गोष्ठी अथवा संभाषण, प्रेमचंद की विचारधारा, उनके साहित्य तथा प्रासंगिकता पर जरूर बात की जाती है। यही तो उनके साहित्य की विशेषता है । 

ध्वनि प्रभाव : .... (तालियाँ)

कलम का सिपाही स्वाध्याय | Kalam ka Sifayi swadhyay | hindi 11th

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