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मध्ययुगीन काव्य - बाल लीला स्वाध्याय | Madhyaugin khawa Swadhyay | 11th hindi

Chapter 5: मध्ययुगीन काव्य - बाल लीला 

मध्ययुगीन काव्य - बाल लीला स्वाध्याय | Madhyaugin khawa Swadhyay | 11th hindi

आकलन [PAGE 25]  

आकलन | Q 1 | Page 25
लिखिए :
यशोदा अपने पुत्र को शांत करते हुए कहती है -
Solution :
हे चंद्रमा तुम आओ, तुम्हें मेरा बेटा बुला रहा है। तुम आओ, वह मधु, मेवा, पकवान और मिठाई खुद खाएगा और तुम्हें भी खिलाएगा। वह तुम्हें हाथ पर लेकर खेलेगा। तुम्हें जमीन पर बिलकुल नहीं बैठाएगा। वे बरतन में पानी भरकर हाथ से ऊपर उठाती हुई कहती हैं कि हे चंदा, तुम इसी पानी में शरीर धारण कर आ जाओ। के बर्तन का पानी जमीन पर लिखकर कृष्ण से कहती हैं, देखो, मैं वह चाँद पकड़ कर लाई हूँ।

आकलन | Q 2 | Page 25
निम्नलिखित शब्दों से संबंधित पद में समाहित एक-एक पंक्ति लिखिए -
(१) फल : __________________
(२) व्यंजन : __________________
(३) पान : __________________
Solution :
(१) फल:  खारिक, दाख, खोपरा, खीरा, । केला आम ईख रस सीरा
(२) व्यंजन:  घेवर फेनी और सुधार, खोवा सहित खाउ बलिहारी।
(३) पान: तब तमोल रचि तुमहिं ख्वाबों। सूरदास पनवारों पावौं।।

काव्य सौंदर्य [PAGE 25]    

काव्य सौंदर्य | Q 1 | Page 25
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
‘‘जलपुट आनि धरनि पर राख्यौ।
गहि आन्यौ वह चंद दिखावै।।’’
Solution :
उपर्युक्त पंक्तियों में सूरदास ने माता यशोदा द्वारा बालक कृष्ण को बहका कर उनके समक्ष सशरीर चंद्रमा को उपस्थित कर देने का सुंदर और स्वाभाविक वर्णन किया है। बच्चे के प्रति माँ का स्नेह बहुत प्रगाढ़ होता है। वह अपने बच्चे की हर इच्छा पूरी करने की जी-जान से कोशिश करती है। वह अपने बालक को आसमान के तारे तोड़कर ला सकती है। कवि ने 'गहि आन्यौ वह चांद दिखावै' पंक्ति से माता यशोदा की इन्ही भावनाओं का मनोहारी वर्णन किया है।

काव्य सौंदर्य | Q 2 | Page 25
निम्नलिखित पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए -
‘‘रचि पिराक, लड्‌डू, दधि आनौ।
तुमकौं भावत पुरी सँधानौं।।’’
Solution :
माता यशोदा को बालक कृष्ण की रुचि की एक-एक चीज की जानकारी है। वे उनके कलेवे के लिए चुन-चुन कर सभी खाद्य पदार्थ ले आई हैं और उनसे कलेवा कर लेने का मनुहार कर रही हैं। वे उनके लिए अपने हाथों से बनाई गुझिया, लड्डू और दही ले आई हैं। वे कृष्ण से कहती हैं कि पूड़ी और अचार भी है, जो तुम्हें सबसे ज्यादा पसंद है। वे सभी खाद्य पदार्थों का नाम ले-लेकर उनसे कलेवा कर लेने का मनुहार करती हैं।

अभिव्यक्ति [PAGE 25]    

अभिव्यक्ति | Q 1 | Page 25
‘माँ ममता का सागर होती है’, इस उक्ति में निहित विचार अपनेशब्दों में लिखिए।
Solution :
माँ और ममता एक-दूसरे के पर्याय हैं। माँ के रोम रोम से ममता की झलक मिलती है। माँ का बच्चों के प्रति स्नेह अवर्णनीय होता है। वह अपने बच्चे की खुशी के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने के लिए तत्पर रहती है। वह बचपन में रात-रात भर जागकर अपने बच्चे की देखभाल और सेवा करती है। माँ के लिए कोई अपना या पराया नहीं होता।

 उसके हृदय में जितना स्नेह अपने बच्चे के लिए होता है, उतना ही स्नेह दूसरे के बच्चों के लिए भी होता है। उसका हृदय विशाल होता है। उसमें सबके लिए एक जैसा प्यार होता है। माँ की सहनशीलता और क्षमाशीलता का कोई जोड़ नहीं होता। माता की करुणा किसी भी बालक पर उमड़ सकती है। यदि संतान को कहीं किसी कारण से विलंब हो जाए तो माता प्रतीक्षारत रहती है।

 वास्तव में जननी मानवी होकर भी जगज्जननी की ही प्रतिमूर्ति होती है। माता की ममता का कोई आरपार नहीं होता। हमारे यहाँ माता के उपकारों को देखते हुए उसे देवता के समान पूजनीय माना गया है 'मातृ देवो भव।'

रसास्वादन [PAGE 26]    

रसास्वादन | Q 1 | Page 26
बाल हठ और वात्सल्य के आधार पर सूर के पदों का रसास्वादन कीजिए।
Solution :
संत कवि सूरदास ने 'बाल लीला' में बालक कृष्ण के बालहठ और माता यशोदा के वात्सल्य का अत्यंत सुंदर एवं स्वाभाविक चित्रण किया है। बालक कृष्ण चंदा को पाने का हठ कर रहे हैं और माता यशोदा उन्हें समझा रही हैं कि वे चंदा को पकड़ कर लाएँगी और उनके समक्ष लाकर हाजिर करेंगी वे चंदा को कृष्ण की तरह ही बालक मानकर उसे संबोधित करती हैं। इस पद में सूरदास जी ने चंदा का मानवीकरण करते हुए माता यशोदा से उसे एक बालक के रूप में संबोधित कराते हुए कहलवाया  है कि वह आ जाए, 

उसे उनका लाल कृष्ण बुला रहा है। कृष्ण उसे अपने साथ तरह-तरह के व्यंजन खिलाएगा। वह उसे हाथ पर लेकर खिलाएगा, जमीन पर भी नहीं उतारेगा। यशोदा बर्तन में पानी लेकर चंदा से उस पानी में शरीर धारण कर आ जाने के लिए कहती हैं। फिर पानी सहित वह बर्तन जमीन पर रखकर कृष्ण से दावे के साथ कहती हैं कि देखो, इस पानी में में चंदा को पकड़ लाई हूँ। उनके चंदा को पकड़ कर ले आने में बालक कृष्ण के प्रति उनके स्नेह के सुंदर दर्शन होते हैं।

इन पदों में कवि ने लोकगीतों की पद-शैली में अत्यंत सीधे-सादे और सरल शब्दों में बाल हठ और माता के वात्सल्य का सुंदर चित्रण किया है। प्रसाद एवं माधुर्य गुण कविता में स्पष्ट दिखाई देते हैं।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान [PAGE 26]    

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 1 | Page 26
जानकारी दीजिए :
संत सूरदास के प्रमुख ग्रंथ - ____________ ____________
Solution :
(१) सूरसागर
(२) साहित्य लहरी।

साहित्य संबंधी सामान्य ज्ञान | Q 2 | Page 26
संत सूरदास की रचनाओं के प्रमुख विषय - ________________________
Solution :
कृष्ण की बाल लीलाओं तथा वात्सल्य भाव का चित्रण, गोपियों का विरह वर्णन।

  मध्ययुगीन काव्य - बाल लीला स्वाध्याय | Madhyaugin khawa Swadhyay | 11th hindi 

कवि परिचय ः संत सूरदास का जन्म १4७8 को दिल्ली के पास सीही नामक गाँव में हुआ। आरंभ में आप आगरा और मथुरा के बीच यमुना के किनारे गऊघाट पर रहे। वहीं आपकी भेंट गुरु वल्लभाचार्य से हुई। अष्टछाप कवियों की सगुण भक्ति काव्य धारा के आप एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी भक्ति में साख्य, वात्सल्य और माधुर्य भाव निहित हैं। कृष्ण की बाल लीलाओं तथा वात्सल्य भाव का सजीव चित्रण आपके पदों की विशेषता है। संत सूरदास की मृत्यु१58० में हुई । 

प्रमुख कृतियाँ ः ‘सूरसागर’, ‘सूरसारावली’ तथा ‘साहित्यलहरी’ आदि। 

काव्य प्रकार ः ‘पद’ काव्य की एक गेय शैली है। हिंदी साहित्य में ‘पद शैली’ की दो निश्चित परंपराएँ मिलती हैं, एक संतों के ‘सबद’ की और दूसरी परंपरा कृष्णभक्तों की ‘पद शैली’ है, जिसका आधार लोकगीतों की शैली है। भक्ति भावना की अभिव्यक्ति के लिए पद शैली का प्रयोग किया जाता है। 

काव्य परिचय ः प्रस्तुत पदों में कवि ने कृष्ण के बाल हठ एवं यशोदा की ममतामयी छबि को प्रस्तुत किया है। प्रथम पद में अपने लाल की हर इच्छा पूरी करने को आतुर यशोदा चाँद पाने के कृष्ण हठ को चाँद की छबि दिखाकर बहला लेती है। चाँद को देखने पर कृष्ण की मोहक मुस्कान देख माँ यशोदा बलिहारी हो जाती है। द्‌वितीय पद में माँ यशोदा कृष्ण को कलेवा करने के लिए दुलार रही है। उनकी पसंद के विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजन सामने रख वह मनुहार कर रही है।

  Chapter 5 - मध्ययुगीन काव्य - बाल लीला Balbharati solutions for Hindi - Yuvakbharati 11th Standard HSC Maharashtra State Board


बार बार जसुमति सुत बोधति, आउ चंद तोहिंलाल बुलावै ।
मधु मेवा पकवान मिठाई, आपुन खैहै, तोहिं खवावै ।।

हाथहिं पर तोहिंलीन्हे खेलै, नैंकु नहीं धरनी बैठावै ।
जल-बासन कर लै जु उठावति, याही मैं तू तन धरि आवै ।।

जलपुट आनि धरनि पर राख्यौ, गहि आन्यौ वह चंद दिखावै।
सूरदास प्रभु हँसि मुसक्याने, बार बार दोऊ कर नावैं ।।


उठिएे स्याम कलेऊ कीजै । मनमोहन मुख निरखत जी जै ।।
खारिक दाख खोपरा खीरा । केरा आम ऊख रस सीरा ।।

श्रीफल मधुर चिरौंजी आनी । सफरी चिउरा अरुन खुबानी ।।
घेवर फेनी और सुहारी । खोवा सहित खाहु बलिहारी ।।

रचि पिराक लड्डू दधि आनौं । तुमकौं भावत पुरी सँधानौं ।।
तब तमोल रचि तुमहिं खवावौं । सूरदास पनवारौ पावौं ।।
(‘सूरसागर’ से)

Balbharati solutions for Hindi - Yuvakbharati 11th Standard HSC Maharashtra State Board chapter 5 - मध्ययुगीन काव्य - बाल लीला [Latest edition]

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