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अकथ कथ्‍यौ न जाइ कविता 10th हिंदी [ स्वाध्याय भावार्थ रसास्वादन ]

अकथ कथ्‍यौ न जाइ कविता 10th हिंदी [ स्वाध्याय भावार्थ रसास्वादन ]

राम नाम षेती राम नाम बारी ।।
हमारै धन बाबा बनवारी ।।टेक।।
या धन की देषहु अधिकाई ।
तसकर हरै न लागै काई ।।१।।
दहदिसि राम रह्या भरपूरि ।
संतनि नीयरै साकत दूरि ।।२।।
नामदेव कहै मेरे क्रिसन सोई ।
कूंत मसाहति करै न कोई ।।३।।

राम सो नामा नाम सो रामा ।
तुम साहिब मैं सेवग स्‍वामा ।।टेक।।
हरि सरवर जन तरंग कहावै ।
सेवग हरि तजि कहुंकत जावे ।।१।।
हरि तरवर जन पंषी छाया ।
सेवग हरिभजि आप गवाया ।।२।।

जन नामदेव पायो नांव हरी ।
जम आय कहा करिहै बौरे ।
अब मोरी छूटि परी ।।टेक।।
भाव भगति नाना बिधि कीन्ही ।
फल का कौन करी ।
केवल ब्रह्म निकटि ल्‍यौ लागी ।
मुक्‍ति कहा बपुरी ।।१।।
नांव लेत सनकादिक तारे ।
पार न पायो तास हरी ।
नामदेव कहै सुनौ रे संतौ ।
अब मोहिं समझि परी ।।२।।

रामनाम जपिबौ श्रवननि सुनिबौ ।
सलिल मोह मैं बहि नहीं जाईबौ ।।टेक।।
अकथ कथ्‍यौ न जाइ ।
कागद लिख्यौ न माइ ।
सकल भुवनपति मिल्‍यौ है सहज भाइ ।।१।।
राम माता, राम पिता, राम सबै जीव दाता ।
भणत नामईयौ छीपै ।
कहै रे पुकारि गीता ।।२।।

अकथ कथ्‍यौ न जाइ कविता 10th हिंदी [ स्वाध्याय भावार्थ रसास्वादन ]

राम नाम षेती राम नाम बारी ।। हमारै धन बाबा बनवारी ।।टेक।। या धन की देषहु अधिकाई । तसकर हरै न लागै काई ।।१।। दहदिसि राम रह्या भरपूरि । संतनि नीयरै साकत दूरि ।।२।।


परिचय

जन्म ः १२७०, सातारा (महाराष्‍ट्र)
मृत्यु ः १३5०, पंढरपुर (महाराष्‍ट्र)

परिचय ः संत नामदेव का महाराष्‍ट्र मंे वही स्‍थान है जो संत कबीरअथवा संत सूरदास का उत्‍तर भारतमें है । विठ्ठल भक्‍ति आपको विरासत में मिली । आपका संपूर्णजीवन मानव कल्‍याण में समर्पितरहा । आप अपनी उच्चकोटि की आध्यात्‍मिक उपलब्‍धियों के लिए विख्यात हुए । विश्व में आपकी पहचान ‘संत शिरोमणि’ के रूप में है । आपने पंजाबी, मराठी औरहिंदी में रचनाएँ की हैं । 

प्रमुख कृतियाँ ः संत नामदेव की ‘अभंग गाथा’ (लगभग २5०० अभंग) प्रसिद्ध हैं । आपने हिंदी भाषा में भी कुछ अभंगों की रचना (लगभग १२5) की है ।


प्रस्तुत पदों में संत नामदेव ने ‘राम नाम’ की महिमा का गुणगान किया है । संत नामदेव का कहना है कि ‘राम नाम’ का जाप ही खेती-बारी है । ‘राम नाम’ ही जीवन का आधार है । इसी ‘राम नाम’ का जाप ॠषि-मुनि करते रहते हैं । इसी नाम का जप और श्रवण द्‍वारा जीवन-मरण से मुक्ति मिल सकती है ।

  1. षेती स्‍त्री. सं.(दे.) = खेती, कृषि
  2. देषहु क्रि.(दे.) = देखना 
  3. सेवग पुं.सं.(दे.) = सेवक 
  4. सरवर पुं.सं.(दे.) = तालाब, सरोवर
  5. पंषी पुं.सं.(दे.) = पंछी, पक्षी
  6. जम पुं.सं.(दे.) = यमराज
  7. बौरे पुं.सं.(दे.) = नादान 
  8. बपुरी वि.(दे.) = तुच्छ, बेचारी

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