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फीचर लेखन - Feature lekhan in hindi | फीचर लेखन क्या है [12th लेखक रचना स्वाध्याय ]

फीचर लेखन -  Feature lekhan in hindi | फीचर लेखन क्या है 

फीचर लेखन -  Feature lekhan in hindi | फीचर लेखन क्या है

पाठ पर आधारित 

पाठ पर आधारित | Q 1 | Page 90
1) फीचर लेखन की विशेषताएँ लिखिए ।
SOLUTION
फीचर किसी विशेष घटना, व्यक्ति, जीव-जंतु, स्थान, प्रकृति-परिवेश से संबंधित व्यक्तिगत अनुभूतियों पर आधारित आलेख होता है। फीचर समाचारों को नया आयाम देता है, उनका परीक्षण करता है तथा उन पर नया प्रकाश डालता है। फीचर समाचार पत्र का प्राण तत्त्व होता है। पाठक की प्यास बुझाने, घटना की मनोरंजनात्मक अभिव्यक्ति की कला का नाम फीचर है। फीचर किसी गद्य गीत की तरह होता है जो बहुत लंबा, नीरस और गंभीर नहीं होना चाहिए। इससे पाठक बोर हो जाते हैं और ऐसे फीचर कोई पढ़ना नहीं चाहता। फीचर किसी विषय का मनोरंजन शैली में विस्तृत विवेचन है। अच्छा फीचर नवीनतम जानकारी से परिपूर्ण होता है। किसी घटना की सत्यता, तथ्यता फीचर का मुख्य तत्त्व है। 

फीचर लेखन में शब्द चयन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। लेखन की भाषा सहज, संप्रेषणीयता से परिपूर्ण होनी चाहिए। प्रसिद्ध व्यक्तियों के कथनों, उद्धरणों, लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग फीचर में चार चाँद लगा देता है। फीचर लेखन में भावप्रधानता होनी चाहिए, क्योंकि नीरस फीचर कोई भी नहीं पढ़ना चाहता। फीचर से संबंधित तथ्यों का आधार दिया जाना चाहिए। विश्वसनीयता के लिए फीचर में तार्किकता आवश्यक है। तार्किकता के बिना फीचर अविश्वसनीय बन जाता है। फीचर में विषय की नवीनता होना आवश्यक है, क्योंकि उसके अभाव में फीचर अपठनीय हो जाता है। फीचर में किसी व्यक्ति अथवा घटना विशेष का उदाहरण दिया गया हो तो उसकी संक्षिप्त जानकारी भी देनी चाहिए। फीचर के विषयानुकूल चित्रों, कार्टूनों अथवा फोटो का उपयोग किया जाए तो फीचर अधिक प्रभावशाली बन जाता है। फीचर लेखन में राष्ट्रीय स्तर के तथा अन्य महत्त्वपूर्ण तथा समसामयिक विषयों का समावेश होना चाहिए। फीचर पाठक की मानसिक योग्यता और शैक्षिक पृष्ठभूमि के अनुसार होना चाहिए।

2) फीचर लेखन के सोपानों को स्पष्ट कीजिए ।
SOLUTION
फीचर लेखन की प्रक्रिया के निम्नलिखित सोपान हैं
(१) प्रस्तावना : प्रस्तावना में फीचर के विषय का संक्षिप्त परिचय दिया जाता है। यह परिचय आकर्षक और विषयानुकूल होना चाहिए। परिचय पढ़कर पाठकों के मन में फीचर पढ़ने की जिज्ञासा जाग्रत होती है और पाठक अंत तक फीचर से जुड़ा रहता है।

(२) विवरण अथवा मुख्य कलेवर : फीचर में विवरण का महत्त्वपूर्ण स्थान है। फीचर में लेखक स्वयं के अनुभव, लोगों से प्राप्त जानकारी और विषय की क्रमबद्धता, रोचकता के साथ-साथ संतुलित तथा आकर्षक शब्दों में पिरोकर उसे पाठकों के सम्मुख
रखता है जिससे फीचर पढ़ने वाले को ज्ञान और अनुभव से संपन्न कर दे।

(३) उपसंहार : यह अनुच्छेद संपूर्ण फीचर का सार अथवा निचोड़ होता है। इसमें फीचर लेखक फीचर का निष्कर्ष भी प्रस्तुत कर सकता है अथवा कुछ अनुत्तरित प्रश्न पाठकों के ऊपर भी छोड़ सकता है। उपसंहार ऐसा होना चाहिए जिससे पाठक को विषय से संबंधित ज्ञान भी मिल जाए और उसकी जिज्ञासा भी बनी रहे।

(४) शीर्षक : विषय का ओचित्यपूर्ण शीर्षक फीचर की आत्मा है। शीर्षक संक्षिप्तं रोचक और जिज्ञासा वर्धक होना चाहिए। नवीनता, आकर्षकता और ज्ञान बुद्धि उत्तम शीर्षक के गुण हैं।

3) फीचर लेखन करतेसमय बरती जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डालिए ।
SOLUTION
फीचर लेखन करते समय बरती जाने वाली सावधानियाँ :
(१) फीचर लेखन में आरोप-प्रत्यारोप करने से बचना चाहिए।
(२) फीचर लेखन में आलंकारिक और अति क्लिष्ट भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
(३) फीचर लेखन में अति नाटकीयता से बचना चाहिए।
(४) झूठा तथ्यात्मक आंकड़े, प्रसंग अथवा घटनाओं का उल्लेख करना उचित नहीं।
(५) फीचर लेखन में अति कल्पनाओं और हवाई बातों के प्रयोग से बचना चाहिए।
(६) फीचर लेखन में भावप्रधानता होनी चाहिए, क्योंकि नीरस फीचर कोई भी नहीं पढ़ना चाहता।
(७) फीचर बहुत लंबा, उबाऊ और गंभीर नहीं होना चाहिए। फीचर में विषय की नवीनता होना आवश्यक है।
(८) फीचर लेखन की भाषा सहज, संप्रेषणीयता से परिपूर्ण होनी चाहिए।
(९) फीचर से संबंधित तथ्यों का आधार दिया जाना चाहिए। विश्वसनीयता के लिए फीचर में तार्किकता आवश्यक है।
(१०) फीचर लेखन पाठक की मानसिक योग्यता और शैक्षिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
(११) फीचर में किसी व्यक्ति अथवा घटना विशेष का उदाहरण दिया गया हो तो उसकी संक्षिप्त जानकारी भी देनी चाहिए।
(१२) फीचर के विषयानुकूल चित्रों, कार्टूनों अथवा फोटो का उपयोग किया जाए तो फीचर अधिक प्रभावशाली बन जाता है।
(१३) फीचर लेखन में राष्ट्रीय स्तर के तथा अन्य महत्त्वपूर्ण तथा समसामयिक विषयों का समावेश होना चाहिए।


4) भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर फीचर लेखन कीजिए।
SOLUTION
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम डॉ विक्रम साराभाई की संकल्पना है। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। वर्तमान में इस कार्यक्रम की कमान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के हाथों में है। इसरो की स्थापना १९६९ में डॉ. विक्रम साराभाई की अध्यक्षता में की गई। इसका मुख्यालय बंगलौर में है। भारत ने अपने पहले अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ की थी। जब पहले उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा गया तब शायद ही किसी ने सोचा हो कि भारत का अंतरिक्ष यान किसी दिन मंगल ग्रह के लिए जा सकेगा। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से कई बड़े वैज्ञानिक जुड़े रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम भी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान दे चुके हैं।

स्थापना के बाद से ही भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम अच्छी तरह से ऑर्केस्ट्रेटेड किया गया है और इसमें संचार और रिमोट सेंसिंग के लिए उपग्रह, अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली और अनुप्रयोग कार्यक्रम जैसे तीन अलग-अलग तत्त्व थे। प्राकृतिक संसाधनों और आपदा प्रबंधन सहायता की निगरानी और प्रबंधन के लिए दूरसंचार, टेलीविजन प्रसारण और मौसम संबंधी सेवाओं और रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट के लिए दो प्रमुख परिपालन प्रणालियों को भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह स्थापित किया गया है।

१९६० और १९७० के दशक के दौरान भारत ने भू राजनीतिक और आर्थिक विचारों के कारण अपना स्वयं का लॉन्च वाहन कार्यक्रम प्रारंभ किया। देश ने एक साउंडिंग रॉकेट प्रोग्राम विकसित किया और १९८० के दशक तक सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल -३ और अधिक उन्नत, संवर्धित सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (ए एस एल वी) को परिचालन सहायक बुनियादी ढाँचे के साथ पूरा किया।

सबसे पहले थुंबा को रॉकेट लॉन्चिग सेंटर के तौर पर चुना गया था। धरती की भू चुंबकीय भूमध्य रेखा थुंबा से गुजरती है। भारत ने पहला रॉकेट २१ नवंबर १९६३को लॉन्च किया था यानी मंगल यान से करीब ५0 साल पहले। ये एक नाइक-अपाचे रॉकेट था। १९७५ में भारत ने अपना पहला उपग्रह आर्यभट्ट लॉन्च किया और इस तरह अंतरिक्ष युग में प्रवेश किया। इसका वजन सिर्फ ३६० किलोग्राम था और इसका नाम प्राचीन भारत के प्रसिद्ध खगोलविद् आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था।

भास्कर - १ भारत का पहला रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट था, इस उपग्रह का कैमरा जो तस्वीरें भेजता था, उन्हें वन, पानी और सागरों के अध्ययन में इस्तेमाल किया जाता था। चंद्रयान का भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्त्वपूर्ण स्थान है। चंद्रयान ने चंद्रमा की सतह पर पानी की खोज की थी।

इसरो ने प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी की उन्नति के लिए अपनी ऊर्जा को आगे बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप पी एस एल वी और जी एस एल वी प्रौद्योगिकियों का निर्माण हुआ। पिछले साढ़े चार दशकों में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम ने एक सुसंगठित, आत्मनिर्भर कार्यक्रम के माध्यम से प्रभावशाली प्रगति की है।

5) लता मंगेशकर पर फीचर लेखन कीजिए ।
SOLUTION
भारत रत्न लता मंगेशकर भारत की प्रतिमा गायिका हैं । उनकी मधुर आवाज की पूरी दुनिया दीवानी है। पिछले छह-सात दशकों से भारतीय सिनेमा को अपनी आवाज के जादू से सराबोर करने वाली लता का जन्म २८ सितंबर, १९२९ को इंदौर के मराठी परिवार में पंडित दीनदयाल के घर में हुआ। लता के पिता रंगमंच के कलाकार और गायक भी थे। अतः संगीत लता को विरासत में मिला। लता के जन्म के कुछ दिन बाद ही इनका परिवार महाराष्ट्र चला गया।

लता मंगेशकर ने अपनी संगीत यात्रा का प्रारंभ मराठी फिल्मों से किया। इन्होंने हिंदुस्तान क्लासिकल म्यूजिक' के उस्ताद अमानत अली खान से क्लासिकल संगीत सीखना शुरू किया। भारत बँटवारे के बाद उस्ताद अमानत अली खान के पाकिस्तान चले जाने के बाद लता ने बड़े गुलाम अली खान, पंडित तुलसीदास शर्मा तथा उस्ताद अमानत खान देवसल्ले से संगीत सीखा।

गुलाम हैदर ने १९४८ में लता को 'मजबूर' फिल्म में पहला ब्रेक दिया। तब से लेकर १९८९ तक लता मंगेशकर ने ३०००० से भी अधिक गाने गाए हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इस दौर में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का शायद ही कोई ऐसा फिल्म निर्देशक और संगीत निर्देशक होगा, जिसके साथ लता जी ने काम न किया हो। लता मंगेशकर अत्यंत शांत स्वभाव और प्रतिभा की धनी हैं। उन्होंने रागों पर आधारित अनेक गाने गाए, तो दूसरी ओर अल्लाह तेरो नाम' और 'प्रभु तेरो नाम' जैसे भजन भी गाए, वहीं १९६३ में पंडित जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में देश का सबसे जीवंत गीत ऐ मेरे वतन के लोगों गाया। इस गाने को सुनते समय नेहरू जी की आँखों से आँसू बह निकले थे।

लता मंगेशकर भारतीय संगीत में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए पद्मभूषण, पद्मविभूषण, दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड, महाराष्ट्र भूषण अवॉर्ड, भारत रत्न, ३ बार राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड, बंगाल फिल्म पत्रकार संगठन अवॉर्ड, फिल्म फेअर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सहित अनेक अवॉर्ड जीत चुकी हैं। आज पूरी संगीत दुनिया उनके आगे नतमस्तक है।

फीचर लेखन -  Feature lekhan in hindi | फीचर लेखन क्या है 

लेखक परिचय ः डॉ. बीना शर्मा जी का जन्म २० अक्तूबर १९5९ को उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में हुआ । आप लेखिका  एवं कवयित्री के रूप में चर्चित हैं । हिंदी शिक्षा में हिंदीतर और विदेशी विद्यार्थियों के लिए आपके द्वारा किया गया कार्य उल्लेखनीय माना जाता है । आपका लेखन शिक्षा क्षेत्र और भारतीय संस्कृति से प्रेरित है । स्त्री विमर्शतथा समसामयिक विषय  पर आपका लेखन विशेष परिचित है । भारतीय संस्कारों और जीवनमूल्यों के प्रति आपका साहित्य आग्रही रहा है । लेखन  कार्य के साथ-साथ आप सामाजिक कर्तव्यों के प्रति भी जागरूकता का निर्वाह करती हैं । वर्तमान में आप केंद्रीय हिंदी  संस्थान, आगरा में आचार्य एवं कुलसचिव के पद पर आसीन हैं ।

प्रमुख कृतियाँ ः ‘हिंदी शिक्षण-अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य’, ‘भारतीय सांस्कृतिक प्रतीक’ आदि ।

कहानी ः कहानी में संश्लिष्टता तत्त्व होने के कारण पढ़ने में शिथिलता नहीं आती । जीवन के अनुभव संक्षेप में अवगत हो  जाते हैं । कम पात्रों द्वारा जीवन का बृहत पट रखना कहानी की विशेषता है । ‘गागर में सागर भरना’ वाली कहावत कहानी  पर चरितार्थ होती है । कहानी में जीवन के किसी एक प्रसंग अथवा अंश का उद्घाटन रहता है ।

पाठ परिचय ः यहाँ फीचर लेखन की प्रस्तुति ‘कहानी’ के माध्यम से की गई है । फीचर लेखन पत्रकारिता क्षेत्र का मुख्य आधार स्तंभ बन गया है । फीचर का मुख्य कार्यकिसी विषय का सजीव वर्णन पाठक के सम्मुख करना होता है । प्रस्तुत पाठ  में फीचर लेखिका स्नेहा के माध्यम से फीचर लेखन का स्वरूप, उसकी विशेषताएँ, प्रकार आदि पर प्रकाश डाला गया है ।  साथ ही लेखिका ने इस तथ्य को हमारे सामने रखा है कि फीचर लेखन का क्षेत्र रोजगार का माध्यम बन सकता है तथा समाज  के सम्मुख सच्चाई का दर्पण रख सकता है ।

आज स्नेहा बहुत आनंदित थी । उसका पूरा परिवार  गर्व की भावना से भरा हुआ था । उन सबकी आँखों से  स्नेहा के लिए स्नेह का भाव झर रहा था । पत्रकारिता क्षेत्र में फीचर लेखन के लिए दिए जाने  वाले ‘सर्वश्रेष्ठ फीचर लेखन’ के राष्ट्रीय पुरस्कार से उसे  सम्मानित किया गया था । आज उसके परिवार द्‌वारा इसी के उपलक्ष्य में छोटी-सी पार्टी दी जा रही थी । स्नेहा के  पति, उसकी बेटी-प्रिया, बेटा-नैतिक और उसके  सास-ससुर उसे बधाई दे रहे थे । इतना सारा आदर-स्नेह  पाकर स्नेहा की आँखें छलछला आईं... आँसुओं की  छलछलाहट में उसके फीचर लेखन की पूरी यात्रा झलक  आई थी । बी.ए. कर लेने के पश्चात पिता जी ने स्नेहा से पूछा  था, ‘‘अब आगे क्या करना चाहती हो? मैंने तो लड़का  देखना शुरू किया है ।’’ 

स्नेहा ने हँसकर उत्तर दिया, ‘‘पापा, मैं पत्रकारिता  का कोर्स करना चाहती हूँ । मुझे न्यूज चैनल देखना अच्छा लगता है ।’’ माँ ने भी स्नेहा की इस इच्छा का समर्थन किया 
था । स्नेहा ने पत्रकारिता का कोर्स ज्वाइन कर लिया । पत्रकारिता की कक्षा का प्रथम दिवस... स्नेहा कक्षा में पहुँच गई । अन्य विद्यार्थी भी कक्षा में बैठे हुए थे । सबसे  जान-पहचान हुई । वह सबके साथ घुल-मिल गई । पहला लेक्चर प्रारंभ हुआ । प्रोफेसर ने पत्रकारिता  पाठ्यक्रम का पहला पेपर पढ़ाना प्रारंभ किया । विषय था-  फीचर लेखन । सबसे पहले उन्होंने फीचर लेखन की  विभिन्न परिभाषाओं को समझाते हुए कहा, ‘‘जेम्स डेविस  फीचर लेखन क्षेत्र में एक चर्चित नाम है । वे कहते हैं,  ‘‘फीचर समाचारों को नया आयाम देता है, उनका परीक्षण

करता है, विश्लेषण करता है तथा उनपर नया प्रकाश  डालता है ।’’ स्नेहा की पत्रकारिता और विशेष रूप में फीचर  लेखन में बहुत रुचि थी । इसलिए उसने कहा, ‘‘सर !  पी.डी. टंडन ने भी फीचर लेखन को परिभाषित किया है ।’’ ‘‘हाँ... पी.डी. टंडन कहते हैं- ‘‘फीचर किसी गद्य गीत की भाँति होता है; जो बहुत लंबा, नीरस और  गंभीर नहीं होना चाहिए । अर्थात फीचर किसी विषय का  मनोरंजक शैली में विस्तृत विवेचन है ।’’ स्नेहा इन  परिभाषाओं को रटते-रटते समझ गई थी कि फीचर  समाचारपत्र का प्राणतत्त्व होता है । पाठक की प्यास  बुझाने, घटना की मनोरंजनात्मक अभिव्यक्ति करने की  कला का नाम ही फीचर है ।

‘‘मम्मी... चलिए न ! हॉल में सभी आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं ।’’ प्रिया के इन शब्दों से स्नेहा अपने में लौटी ।  बेटी प्रिया उसे चलने के लिए कह रही थी । ‘‘अरे हाँ प्रिया ! चल रही हूँ ।’’ कहती हुई स्नेहा  अपने घर के हॉल में प्रविष्ट हुई । हॉल में स्नेहा के पति,  बेटा, सास-ससुर, करीबी रिश्तेदार तथा पत्रकार मित्र उपस्थित थे । तभी हॉल में प्रविष्ट होते एक व्यक्ति को  देखकर स्नेहा की आँखें फटी-की-फटी रह गईं । वह  व्यक्ति देश के विख्यात समाचारपत्र के संपादक थे । ‘‘सर आप और यहाँ?’’ स्नेहा के मुँह से बरबस  निकला । ‘‘क्यों? मैं नहीं आ सकता इस अवसर पर ?’’ ‘‘ऐसी बात नहीं है... अचानक आपको...’’
‘‘स्नेहा, बहुत-बहुत बधाई ! आज तुमने फीचर  लेखन में शीर्ष स्थान पा लिया है ।’’ स्नेहा की बात काटकर  संपादक ने बधाई दी । सभी ने एक स्वर में कहा, ‘‘बधाई  हो ।

’’ इन शब्दों को सुनते ही स्नेहा दस वर्ष पूर्व की दुनिया  में चली गई । पत्रकारिता कोर्स के बीतते दिन-महीने...  फीचर लेखन के संबंध में सुने हुए लेक्चर्स... प्रोफेसरों से  की गई चर्चाएँ... अध्ययन, परीक्षा... फीचर लेखन का  प्रारंभ... फीचर लेखन की सिद्‌धहस्त लेखिका बनना ही उसका एकमात्र सपना था । उसकी यादों में वह दिन तैर गया... जब उसे  पत्रकारिता कोर्स में फीचर लेखन पर व्याख्यान देने के लिए  बुलाया गया था । हॉल विद्यार्थियों से खचाखच भरा हुआ  था । आज उसे अपने परिश्रम सार्थक होते नजर आ रहे  थे । फीचर लेखन पर स्नेहा ने बोलना प्रारंभ किया । रोचक  प्रसंगों के साथ स्नेहा विद्यार्थियों को फीचर लेखन की  विशेषताएँ बताने लगी, ‘‘अच्छा फीचर नवीनतम जानकारी  से परिपूर्ण होता है । किसी घटना की सत्यता अथवा तथ्यता  फीचर का मुख्य तत्त्व है । फीचर लेखन में राष्ट्रीय स्तर के  तथा अन्य महत्त्वपूर्ण विषयों का समावेश होना चाहिए  क्योंकि समाचारपत्र दूर-दूर तक जाते हैं । इतना ही नहीं; फीचर का विषय समसामयिक होना चाहिए । फीचर लेखन में भावप्रधानता होनी चाहिए क्योंकि नीरस फीचर कोई नहीं पढ़ना चाहता । फीचर के विषय से  संबंधित तथ्यों का आधार दिया जाना चाहिए ।’’ स्नेहा  आगे बोलती जा रही थी, ‘‘विश्वसनीयता के लिए फीचर  में विषय की तार्किकता को देना आवश्यक होता है । 

 तार्किकता के बिना फीचर अविश्वसनीय बन जाता है । फीचर में विषय की नवीनता का होना आवश्यक है क्योंकि उसके अभाव में फीचर अपठनीय बन जाता है । फीचर में  किसी व्यक्ति अथवा घटना विशेष का उदाहरण दिया गया  हो तो उसकी संक्षिप्त जानकारी भी देनी चाहिए । पाठक की मानसिक योग्यता और शैक्षिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर फीचर लेखन किया जाना चाहिए । उसे  प्रभावी बनाने हेतु प्रसिद्ध व्यक्तियों के कथनों, उद्धरणों,  लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग फीचर में चार चाँद  लगा देता है । फीचर लेखक को निष्पक्ष रूप से अपना मत व्यक्त करना चाहिए जिससे पाठक उसके विचारों से सहमत हो  सके । इसके लेखन में शब्दों के चयन का अत्यंत महत्त्व है । अत: लेखन की भाषा सहज, संप्रेषणीयता से पूर्ण होनी  चाहिए । फीचर के विषयानुकूल चित्रों, कार्टूनों अथवा  फोटो का उपयोग किया जाए तो फीचर अधिक  परिणामकारक बनता है ।’’

स्नेहा अपनी रौ में बोलती जा रही थी तभी एक  विद्यार्थी ने अपना हाथ ऊपर उठाते हुए कहा, ‘‘मैडम,  आपने बहुत ही सुंदर तरीके से फीचर लेखन की विशेषताओं  पर प्रकाश डाला है ।’’‘‘अच्छा ! तो आप लोगों को अब पता चला ।  आपका और कोई प्रश्न है?’’ स्नेहा ने उसे आश्वस्त करते  हुए पूछा । ‘‘मैडम ! मेरा प्रश्न यह है कि फीचर किन-किन  विषयों पर लिखा जाता है और फीचर के कितने प्रकार  हैं?’’ ‘‘बहुत अच्छा, देखिए फीचर किसी विशेष घटना,  व्यक्ति, जीव-जंतु, तीज-त्योहार, दिन, स्थान,  प्रकृति-परिवेश से संबंधित व्यक्तिगत अनुभूतियों पर  आधारित आलेख होता है । इस आलेख को कल्पनाशीलता,  सृजनात्मक कौशल के साथ मनोरंजक और आकर्षक शैली  में प्रस्तुत किया जाता है ।’’  स्नेहा ने सभी पर दृष्टि घुमाई । एक क्षण के लिए  रुकी । फिर बोलने लगी, ‘‘फीचर के अनेक प्रकार हैं ।  उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित हैं :’’

• व्यक्तिपरक फीचर • सूचनात्मक फीचर
• विवरणात्मक फीचर • विश्लेषणात्मक फीचर
• साक्षात्कार फीचर • विज्ञापन फीचर 
‘‘मैडम ! हम जानना चाहते हैं कि फीचर लेखन  करते समय कौन-सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?’’ उसी विद्यार्थी ने जिज्ञासावश प्रश्न किया । ‘बड़ा ही सटीक और तर्कसंगत प्रश्न पूछा है  आपने ।’’ अब स्नेहा ने इस विषय पर बोलना प्रारंभ  किया - 
• ‘‘फीचर लेखन में मिथ्या आरोप-प्रत्यारोप करने से  बचना चाहिए ।
• अति क्लिष्ट और आलंकारिक भाषा का प्रयोग  बिलकुल भी न करें ।
• झूठे तथ्यात्मक आँकड़े, प्रसंग अथवा घटनाओं का  उल्लेख करना उचित नहीं ।
• फीचर अति नाटकीयता से परिपूर्ण नहीं होना  चाहिए ।
• फीचर लेखन में अति कल्पनाओं और हवाई बातों को  स्थान देने से बचना चाहिए ।’’

‘‘इन सभी सावधानियों को ध्यान में रखेंगे तो  आपका फीचर लेखन अधिकाधिक विश्वसनीय और  प्रभावी बन सकता है । आपमें से किसी विद्यार्थी को फीचर  के विषय में कुछ और पूछना है?’’ स्नेहा ने पूरी कक्षा पर  नजर डाली । तभी एक विद्यार्थिनी ने अपना हाथ ऊपर  उठाया । स्नेहा ने उससे प्रश्न पूछने के लिए कहा । ‘‘मैडम ! क्या आप फीचर लेखन की प्रक्रिया पर  प्रकाश डालेंगी?’’ ‘‘हाँ ! हाँ ! क्यों नहीं? फीचर लेखन की प्रक्रिया के 

मुख्य तीन अंग हैं -
(१) विषय का चयन :- फीचर लेखन में विषय का चयन  करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विषय रोचक, ज्ञानवद्‌र्धक और उत्प्रेरित करने वाला होना  चाहिए । अत: फीचर का विषय समयानुकूल, समसामयिक  होना चाहिए । विषय जिज्ञासा उत्पन्न करने वाला हो ।

(२) सामग्री का संकलन :- फीचर लेखन में विषय संबंधी सामग्री का संकलन करना महत्त्वपूर्ण अंग है । उचित जानकारी और अनुभव के अभाव में लिखा गया फीचर  नीरस सिद्ध हो सकता है । विषय से संबंधित उपलब्ध पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं से सामग्री जुटाने के अलावा  बहुत-सी सामग्री लोगों से मिलकर, कई स्थानों पर जाकर  जुटानी पड़ती है ।

(३) फीचर योजना :- फीचर लिखने से पहले फीचर का  एक योजनाबद्ध ढाँचा बनाना चाहिए ।’’ अपने इस मंतव्य के साथ स्नेहा विद्यार्थियों की  जिज्ञासा देखना चाह रही थी, तभी एक विद्यार्थी का ऊपर  उठा हुआ हाथ स्नेहा को दिखाई दिया । स्नेहा ने उसे प्रश्न पूछने के लिए कहा । ‘‘फीचर लेखन के कितने सोपान अथवा चरण होते  हैं; जिनके आधार पर फीचर लिखा जाता है ।’’ विद्यार्थी ने प्रश्न किया ।
‘‘अरे वाह ! कितनी रुचि रखते हैं आप लोग फीचर  में । चलिए, मुझे लगता है, आपका यह प्रश्न भी विषय की  दृष्टि से बहुत महत्त्व रखता है ।’’ स्नेहा ने फीचर लेखन के  चरणों पर बोलना शुरू किया - ‘‘निम्न चार सोपानों अथवा  चरणों के आधार पर फीचर लिखा जाता है ।’’

(१) प्रस्तावना : प्रस्तावना में फीचर के विषय का संक्षिप्त  परिचय होता है । यह परिचय आकर्षक और विषयानुकूल  होना चाहिए । इससे पाठकों के मन में फीचर पढ़ने की जिज्ञासा जाग्रत होती है और पाठक अंत तक फीचर से जुड़ा  रहता है ।
(२) विवरण अथवा मुख्य कलेवर : फीचर में विवरण का  महत्त्वपूर्ण स्थान है । फीचर में लेखक स्वयं के अनुभव,  लोगों से प्राप्त जानकारी और विषय की क्रमबद्धता,  रोचकता के साथ-साथ संतुलित तथा आकर्षक शब्दों में  पिरोकर उसे पाठकों के सम्मुख रखता है जिससे फीचर पढ़ने  वाले को ज्ञान और अनुभव से संपन्न कर दे ।
(३) उपसंहार : यह अनुच्छेद संपूर्ण फीचर का सार अथवा  निचोड़ होता है । इसमें फीचर लेखक फीचर का निष्कर्ष भी  प्रस्तुत कर सकता है अथवा कुछ अनुत्तरित प्रश्न पाठकों  के ऊपर भी छोड़ सकता है । उपसंहार ऐसा होना चाहिए  जिससे विषय से संबंधित पाठक को ज्ञान भी मिल जाए और  उसकी जिज्ञासा भी बनी रहे ।
(4) शीर्षक : विषय का औचित्यपूर्ण शीर्षक फीचर की  आत्मा है । शीर्षक संक्षिप्त, रोचक और जिज्ञासावर्धक  होना चाहिए । नवीनता, आकर्षकता और ज्ञानवृद्‌धि उत्तम  शीर्षक के गुण हैं ।

 ‘‘आपने फीचर पर मेरा व्याख्यान ध्यानपूर्वक सुना ।  मुझे लगता है, आपकी शंकाओं का समाधान हो गया  होगा । इसलिए मैं आप सभी को हृदय से धन्यवाद देती हूँ ।’’ कहकर स्नेहा कुर्सी में बैठ गई । हॉल विद्यार्थियों की  तालियों से गूँज उठा ।  ‘‘मैडम ! कहाँ खो गई हैं आप?’’ एक पत्रकार ने  स्नेहा की ओर गुलदस्ता बढ़ाते हुए कहा । ‘‘जी !’’ स्नेहा चौंक उठी । देखा तो सामने एक  जाना-माना पत्रकार था । उसका भी फीचर लेखन क्षेत्र में  एक नाम था । ‘‘अरे... आप भी तो एक विख्यात फीचर  लेखक हैं ।’’ स्नेहा ने गुलदस्ता स्वीकारते हुए कहा । ‘‘मेरे विख्यात फीचर लेखक होने में आपका बहुत  बड़ा योगदान है ।’’ पत्रकार ने कहा । ‘‘मेरा योगदान ! वह कैसे?’’ स्नेहा ने कुतूहल से  पूछा । ‘‘मैडम ! आपने दस वर्ष पूर्व फीचर लेखन पर जो  व्याख्यान दिया था; उसमें दो महत्त्वपूर्ण प्रश्न पूछने वाला  विद्यार्थी मैं ही था ।’’ उस पत्रकार की आँखों में कृतज्ञता  का भाव था । स्नेहा अवाक्-सी खड़ी थी और हॉल में  तालियों की गूँज बढ़ती जा रही थी ।
 

फीचर लेखन -  Feature lekhan in hindi | फीचर लेखन क्या है 

...प्लेयर केएवार्ड नेबना दिया चैंपियन नागपुर (महाराष्ट्र) की महिमा पांडे ने हाल ही में  टेनिस में सोनाली बत्रा सबा को ३.० से हराकर जूनियर  चैंपियनशिप पर कब्जा बना लिया । इसके साथ ही वह  जूनियर चैंपियनशिप जीतने वाली पहली टेनिस महिला  खिलाड़ी बन गई है । उनका कहना था कि असफलता  सफलता की पहली सीढ़ी है । अत: उदास न होकर  जी-जान से कोशिश करने से सफलता प्राप्त होती है । वे  बताती हैं- ‘‘इससे पहले अंतर्राज्यीय चैंपियनशिप में मिली पराजय ने मुझे पागल प्लेयर का एवार्डमिला । इसी एवार्ड ने मुझे बेहतर खेलने के लिए प्रेरित किया  और आज मैं यह चैंपियनशिप जीत पाई  हूँ ।’’ 

 वस्तुत: खेलकूद हमारे जीवन का  एक अहम हिस्सा है । जो माता-पिता  अपने बच्चों को दिन भर बस पढ़ाई के  लिए दबाव डालते रहते हैं, उनसे मेरा  निवेदन है कि वे अपने बच्चों को  खेलकूद के लिए भी प्रेरित करें । ‘स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास होता है’,  इस सूक्ति के अनुसार बच्चेदिन भर  खेल-कूदकर घर आएँगे तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा । आखिर  बच्चे बाल्यावस्था में खेलकूद नहीं करेंगे तो कब करेंगे ! बचपन में मम्मी-पापा जब भी हमें खेलते देखते तो  एक ही बात बोलते, ‘‘पढ़ोगे, लिखोगे, बनोगे नवाब;  खेलोगे, कूदोगे, बनोगे खराब ।’’ लेकिन बड़े होने के बाद  हम उन्हें प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी, हॉकी खिलाड़ी,  फुटबॉल खिलाड़ी, लॉन टेनिस खिलाड़ियों की तस्वीरें  दिखाकर यही कहते थे कि देखो, ये खिलाड़ी खेलकर ही आज इस मुकाम पर पहुँचे हैं । देखा जाए तो खेलकूद आज सफल कैरियर के रूप  में सामने आ रहे हैं, जिनमें नाम भी है और दाम भी ।  कबड्डी भले ही टाँग खींचने वाला खेल है पर आज इस  खेल ने भी एशियन खेलों में अपनी जगह बना ली है । खेल  चाहे जो हो व्यक्ति को स्फूर्ति प्रदान करता है । मेरी भाँजी रिया का कद छोटा था । 

डॉक्टरों ने भी उसे बैडमिंटन और  बास्केट बॉल खेलने की सलाह दी थी । बॉक्सिंग, एथलिट्स, रग्बी तो हैं ही, इनडोअर गेम्स में शतरंज और टेबल टेनिस भी ऐसे खेल हैं जिनमें नाम और  दाम दोनों कमाए जा सकते हैं । आज महिला घर के सारे काम तो करती ही है,  साथ-ही-साथ समाज, राजनीति, चिकित्सा, कृषि यहाँ  तक कि रक्षा क्षेत्र में भी अपनी पहचान निर्माण कर रही है ।  हमारे सामने कई ऐसे उदाहरण हैं जिनमें पुरुषों ने ही नहीं  बल्कि महिलाओं ने भी आरंभिक  असफलताओं के बावजूद बिना हिम्मत  हारे, बिना निराश हुए खेलों की दुनिया में  अपना स्थान बना लिया है । ओलंपिक  में बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीतने वाली रिया बताती है कि स्टेट चैंपियनशिप में  हारने पर मुझे लूजर बॉक्सर का खिताब  मिला । बस ! मैंने ठान लिया कि अब तो  चैंपियन बनकर ही रहना है और मैं बनी ।  खेलकूद अनजाने में ही जीवन के कई  नियमों से हमें परिचित करवा देते हैं ।  

जैसे- अनुशासन, समय की पाबंदी तथा महत्त्व,  समयसूचकता, मैत्री भावना, टीम वर्क  आदि । सारा दिन किताबों में सिर खपाते या मोबाइल में  गेम्स खेलते बच्चों से भी कहना चाहूँगी कि खेलकूद को  अपने जीवन का हिस्सा बनाओ क्योंकि जो ऊर्जा और  चुस्ती-फुर्ती खेलों से मिलती है, वह अच्छे-से-अच्छे ‘जिम’ में जाने से भी नहीं मिलती । मोटापा कम करने के  साथ अनेक बीमारियों से हमें बचाते हैं ये खेल ! इसलिए खेल जगत में भारत का नाम रोशन करने,  ओलंपिक, एशियाई खेलों में स्वर्ण-रजत पदकों की संख्या बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि अन्य देशों की तरह हम भी खेलों को उचित महत्त्व दें ।

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